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✨ Term 1 Hindi · Chapter 1

स्वदेश

A stirring patriotic poem by गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही', asking: what kind of heart has no love for its own motherland?

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कवि परिचय (About the poet)

Hi, it's Patto! Meet the poet who wrote this fiery poem about loving your own country.
✨ गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' (1883–1972)

One of the Hindi poets who began writing in Brajbhasha and later became one of the finest poets of Khadi Boli. Born in Unnao district, Uttar Pradesh. Because of his government job, he had to adopt a second pen-name, "त्रिशूल," besides "सनेही." Besides nation-love poems, he wrote powerful poems about farmers, laborers, and social evils. Notable works: त्रिशूल तरंग, राष्ट्रीय मंत्र, कृषक क्रंदन.

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कविता (The poem)

वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
जो जीवित जोश जगा न सका,
उस जीवन में कुछ सार नहीं।

जो चल न सका संसार-संग,
उसका होता संसार नहीं॥
जिसने साहस को छोड़ दिया,
वह पहुँच सकेगा पार नहीं।

जिससे न जाति-उद्धार हुआ,
होगा उसका उद्धार नहीं॥
जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रस-धार नहीं।

वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥

जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े,
पाया जिसमें दाना-पानी।
हैं माता-पिता बंधु जिसमें,
हम हैं जिसके राजा-रानी॥

जिसने कि खजाने खोले हैं,
नव रत्न दिये हैं लासानी।
जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी॥

उस पर है नहीं पसीजा जो,
क्या है वह भू का भार नहीं।
निश्चित है निस्संशय निश्चित,
है जान एक दिन जाने को।

है काल-दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को॥
सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।

वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥

— गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'

✨ What the poem means

A heart without love for one's motherland is not truly a heart — it's a stone. The poet argues that every citizen owes everything to their country: the soil they grew up in, their food, their family, even their sense of dignity ("we are its kings and queens"). The country has given the world knowledge and treasures people go mad for. Since life is temporary anyway, courage and love for one's country matter more than fear or hesitation — everything needed for greatness is already in our own hands.

3

मेरी समझ से (Comprehension)

Try each one yourself first, then tap to check!
क — निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए

कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं — यानी एक से ज़्यादा विकल्प सही हो सकते हैं। पहले खुद कोशिश करो, फिर नीचे टैप करके जाँचो!

(ख) संवेदनहीनता से और ★ (ग) कठोरता से — book इसमें एक से ज़्यादा सही उत्तर मानती है। हृदय के पत्थर होने का मतलब है उसमें कोई कोमल भावना नहीं, वह संवेदनहीन और कठोर है। (सामाजिकता और नैतिकता यहाँ लागू नहीं होतीं — पत्थर जैसा हृदय होने का मतलब उल्टा है: बेपरवाह और कठोर होना।)

(ख) देश के प्रति प्रेम — पूरी कविता बार-बार यही कहती है: जिस हृदय में स्वदेश का प्यार नहीं, वह हृदय नहीं, पत्थर है। देश-प्रेम ही इस कविता का मुख्य भाव (और शीर्षक "स्वदेश" का केंद्र-बिंदु) है।

(ग) देश के समस्त नागरिकों के लिए — कवि कहते हैं कि देश का हर नागरिक ऐसे है मानो वह देश का राजा या रानी हो, यानी हर नागरिक को बराबर गौरव और अधिकार प्राप्त है।

(ग) जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है — कविता की पहली और अंतिम पंक्तियाँ बिल्कुल साफ़ कहती हैं: "वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।" यानी पत्थर-सा हृदय वही है जिसमें देश-प्रेम नहीं है।

ख — हो सकता है कि तुम्हारे दोस्तों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। आपस में चर्चा करो कि तुमने ये उत्तर ही क्यों चुने!

क्योंकि देश में हर नागरिक को समान गौरव और अधिकार प्राप्त है — हर नागरिक देश के संसाधनों और गौरव का उतना ही हकदार है जितना राजा-रानी।

समय और समाज के साथ कदम मिलाकर चलना, बदलाव को अपनाना। जो व्यक्ति समाज के साथ नहीं चलता, उसका संसार में कोई स्थान नहीं रहता।

जो व्यक्ति अपने देश की महानता से प्रभावित/द्रवित नहीं होता, वह पृथ्वी पर केवल एक भार (बोझ) है, निरर्थक है।

पंक्तिअर्थ
जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहींजिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो, वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता।
जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहींजो स्वयं के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते, उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है।
जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानीजिस देश की ज्ञान-संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है।
सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहींजिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।

पंक्तियों पर चर्चा

कविता से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए — आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

यह पूरी तरह निश्चित है कि एक दिन हर जीवन को समाप्त होना ही है। जैसे दीये की लौ पर मँडराते पतंगे (परवाने) जल जाना जानते हुए भी लौ की ओर जाते हैं, वैसे ही मृत्यु काल-रूपी दीपक की तरह हमेशा जलती रहती है और सबको एक दिन उसमें समाना है। कवि कहना चाहते हैं कि जब मृत्यु निश्चित ही है, तो जीवन को साहस और देश-प्रेम के लिए बिना डरे लगा देना चाहिए।

देश के लिए जो कुछ भी करना है, वह हमारे अपने हाथों में है — हमारे पास साहस और इच्छाशक्ति रूपी "तोप-तलवार" पहले से मौजूद हैं, बस उनका सही उपयोग करना है। और जिस हृदय में देश-प्रेम नहीं, वह हृदय कहलाने लायक ही नहीं — वह तो बस एक पत्थर है।

जिस हृदय में कोमल भाव (जैसे प्रेम, करुणा, अपनेपन का एहसास) नहीं हैं, जिसमें भावनाओं की धारा नहीं बहती — ऐसा हृदय सचमुच का हृदय नहीं, बल्कि पत्थर जैसा निर्जीव और भावशून्य है, क्योंकि उसमें अपने देश के लिए प्यार नहीं है।

सोच-विचार के लिए

कविता को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए। (क), (ख), (ग) के जवाब ऊपर के reveal में मिल गए — अब बचे दो सवाल यहाँ हैं:

यह एक open-ended सवाल है, अपने शब्दों में लिखो! नमूना उत्तर: देश-प्रेम का मतलब है अपने देश की मिट्टी, संस्कृति, लोगों और प्रकृति से सच्चा लगाव रखना; देश के नियमों का पालन करना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाना, स्वच्छता रखना, और जब भी मौका मिले देश की भलाई के लिए ईमानदारी से अपना काम करना।

नमूना उत्तर: (1) इसमें तुक मिलाना (rhyme) है, जिससे पढ़ते समय एक लय (rhythm) बनती है — जैसे "पत्थर है / प्यार नहीं"। (2) एक ही पंक्ति ("वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं") बार-बार दोहराई गई है, जो कविता के मुख्य संदेश को याद रखने में मदद करती है। (3) "है" शब्द का पंक्ति के आरंभ और अंत दोनों जगह प्रयोग हुआ है, जिससे कविता के लय में विविधता आती है। (4) सरल-सीधे शब्दों और छोटी-छोटी पंक्तियों में गहरी बात कही गई है, जो इसे जोश और उत्साह से भरा हुआ बनाती है।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और लिखिए — यहाँ कोई एक "सही" जवाब नहीं है, कल्पना का इस्तेमाल करो!

नमूना उत्तर: यहाँ सोने-चाँदी जैसे भौतिक खजाने की बात नहीं, बल्कि देश की ज्ञान-संपदा, संस्कृति, कला, साहित्य, प्राकृतिक संसाधनों (जैसे नदियाँ, खनिज, जंगल) और महान विचारकों/ऋषियों की शिक्षाओं जैसे अनमोल खजानों की बात हो सकती है, जिनसे पूरी दुनिया लाभान्वित हुई है।

नमूना उत्तर: 'उगे-बढ़े' हम सब नागरिकों (मनुष्यों) के लिए कहा गया है, क्योंकि जैसे पौधे मिट्टी से पोषण पाकर उगते और बढ़ते हैं, वैसे ही हम भी अपने देश की धरती पर जन्म लेकर, उसकी हवा-पानी-अन्न से पलकर बड़े होते हैं। यह देश हमारी परवरिश की जड़ है।

नमूना उत्तर: पत्थर कठोर, ठंडा, निर्जीव और बेजान होता है — उसमें कोई भावना नहीं होती। कवि यह दिखाना चाहते हैं कि जिस हृदय में देश-प्रेम नहीं है, वह भी उतना ही भावनाशून्य और कठोर है जितना एक पत्थर — इसलिए वह असली हृदय कहलाने लायक ही नहीं।

संकेत (source के अनुसार): पत्थर — "जब मैं नदी में था तो नदी की धारा मुझे बदलती भी थी..." — यह एक रचनात्मक कल्पना अनुच्छेद है, अपनी भाषा में लिखो! नमूना उत्तर:

पत्थर: "मैं पहले एक बड़ी पहाड़ी चट्टान का हिस्सा था। धीरे-धीरे बारिश और हवा ने मुझे तोड़ा, और मैं नदी में जा गिरा। नदी की तेज़ धारा ने वर्षों तक मुझे रगड़ा, घुमाया, और मुझे यह गोल-चिकना आकार दिया। अब मैं यहाँ किनारे पर पड़ा हूँ, बच्चों के खेलने का साथी बन गया हूँ।"
मैं: "वाह! तो तुमने भी कितना कुछ सहा और बदला! क्या तुम्हें बुरा नहीं लगता कि लोग तुम्हें बस एक बेजान पत्थर समझते हैं?" — इस तरह की कल्पना-भरी बातचीत लिखी जा सकती है।

नमूना उत्तर: नदियाँ, जंगल और वन्य-जीव (प्राकृतिक संतुलन के लिए), मिट्टी और जल (खेती और पीने के लिए), ऐतिहासिक इमारतें व स्मारक जैसे ताजमहल-कुतुब मीनार (हमारी विरासत के लिए), भाषाएँ और लोक-कलाएँ (संस्कृति के लिए) — इन सबको बचाना भी उतना ही ज़रूरी है जितना सीमा पर देश की रक्षा करना, क्योंकि इनके बिना देश की पहचान और भविष्य दोनों खतरे में पड़ जाते हैं।

कविता की रचना (Rhyme scheme — तुक मिलाना)

✨ तुक मिलाना क्या है?

कविता की इन पंक्तियों को देखो — "जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े, पाया जिसमें दाना-पानी। हैं माता-पिता बंधु जिसमें, हम हैं जिसके राजा-रानी॥" — यहाँ 'दाना-पानी' और 'राजा-रानी' शब्दों की अंतिम ध्वनि एक-सी है। इस विशेषता को तुक मिलाना (rhyme) कहते हैं — जब कविता की अलग-अलग पंक्तियों के आख़िरी शब्द एक जैसी आवाज़ में खत्म होते हैं।

अब नीचे दिए गए प्रश्नों पर पाँच-पाँच के समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए।

तुक मिलाने से कविता में एक संगीतमय लय (rhythm) पैदा होती है, जिससे इसे पढ़ना और याद रखना आसान हो जाता है। यह कविता को गीत की तरह गाने लायक बनाता है, और सुनने में जोशीला व असरदार लगता है — यही वजह है कि 'स्वदेश' एक आह्वान गीत जैसा प्रभाव छोड़ती है।

नमूना उत्तर: (1) 'हृदय' के लिए 'पत्थर' जैसे रूपक (metaphor) का प्रयोग। (2) मुख्य पंक्ति की बार-बार आवृत्ति (repetition/टेक)। (3) योजक चिह्न (हाइफ़न) से जुड़े शब्द-युग्म जैसे 'दाना-पानी', 'राजा-रानी', 'काल-दीप'। (4) प्रश्न-शैली जैसे "क्या तोप नहीं तलवार नहीं" जो पाठक को सोचने पर मजबूर करती है। (5) छोटी और सरल पंक्तियाँ जो कविता को तेज़ गति और जोश देती हैं।

आपकी कविता — CREATIVE WRITING

देश-प्रेम से जुड़े अपने विचारों को आधार बनाते हुए इस कविता को आगे बढ़ाइए — जैसे source में लिखा है:
"वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।"
इसके आगे अपनी दो-चार पंक्तियाँ खुद लिखने की कोशिश करो — तुक मिलाकर! उदाहरण के लिए तुम "प्यार", "बहार", "त्योहार" जैसे तुकांत शब्द इस्तेमाल कर सकते हो।

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भाषा की बात (Grammar)

(क) शब्द से जुड़े शब्द

WORD WEB

'स्वदेश' शब्द से जुड़े और शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखो, फिर दोस्तों से मिलाकर अपनी सूची बढ़ाओ। कुछ शुरुआती उदाहरण: देशभक्ति, राष्ट्र, मातृभूमि, तिरंगा, स्वतंत्रता, नागरिक, संस्कृति, गौरव — अब खुद और शब्द सोचो और स्वदेश के इर्द-गिर्द अपना शब्द-जाल (mind-map) बनाओ!

(ख) समानार्थी शब्द (Synonyms)

भूधरा, पृथ्वी
दीपप्रदीप, दीपक
हृदयदिल, जी
तलवारकृपाण, असि
दुनियासंसार, जग
पत्थरपाहन, पाषाण

(ग) योजक चिह्न (Hyphen)

💡 योजक चिह्न क्या है?

कविता में आई पंक्तियों में कुछ शब्दों के बीच एक चिह्न (-) लगा है, जैसे "संसार-संग" या "दाना-पानी।" इसे योजक चिह्न कहते हैं। योजक चिह्न दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। कविता में संदर्भ के अनुसार योजक चिह्नों के स्थान पर का, की, के और में से कौन-से शब्द जोड़ेंगे जिससे अर्थ स्पष्ट हो सके, यह नीचे हर पंक्ति के लिए खुद सोचकर लिखो — फिर तुलना करने के लिए tap करो!

जो चल न सका संसार के संग (यह उदाहरण खुद source में संकेत के रूप में दिया गया है)

बहती जिसमें रस की धार

पाया जिसमें दाना और पानी

हैं माता और पिता बंधु जिसमें

हम हैं जिसके राजा और रानी

जिससे न जाति का उद्धार हुआ

(घ) शब्द-मित्र — "है" शब्द का क्रम

💡 गौर करो

इन दो पंक्तियों पर ध्यान दो — "है जान एक दिन जाने को" और "है काल-दीप जलता हरदम" — इन दोनों में 'है' शब्द पहले आया है, जिसके कारण कविता में लयात्मकता आ गई है। यदि 'है' का प्रयोग पंक्ति के अंत में किया जाए तो यह गद्य (सामान्य वाक्य) जैसी लगने लगेगी — जैसे: "जान एक दिन जाने को है।" और "काल-दीप हरदम जलता है।"

भाग 1 — खुद ढूँढ़ो

कविता में से ऐसी दो और पंक्तियाँ चुनो जिनमें 'है' शब्द का प्रयोग पहले हुआ है। चुनी हुई पंक्तियों में शब्दों का स्थान बदलकर 'है' को अंत में ले जाकर दोबारा लिखो। (संकेत: "है जान एक दिन जाने को" और "है काल-दीप जलता हरदम" के अलावा भी देखो — जैसे "है नहीं पसीजा जो" को "नहीं पसीजा जो है" जैसे रूप में सोचकर देख सकते हो।)

'है/हैं' को आगे लाकर: "हैं ज्ञानी भी जिस पर मरते, है दुनिया जिस पर दीवानी।" — जब 'है/हैं' शब्द पंक्ति के आरंभ में आता है, तो कविता में एक खास लय और जोश पैदा होता है, और यह गीत की तरह गाने में ज़्यादा असरदार लगती है। जब 'है' अंत में होता है, तो पंक्ति सामान्य बोलचाल के गद्य वाक्य जैसी लगती है — कम काव्यात्मक। इसीलिए कवि ने जान-बूझकर 'है/हैं' को पंक्ति के आरंभ में रखा है।

कविता का शीर्षक

🏷️ शीर्षक चुनने का खेल

"वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।" — इस कविता का शीर्षक है 'स्वदेश'। कई बार कवि कविता की किसी पंक्ति को ही कविता का शीर्षक बनाते हैं। अगर तुम्हें भी इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो, तो तुम कौन-सी पंक्ति चुनोगे और क्यों?

नमूना उत्तर: मैं "सब कुछ है अपने हाथों में" पंक्ति को शीर्षक चुनूँगा/चुनूँगी, क्योंकि यह कविता के सबसे प्रेरक संदेश — कि देश के लिए कुछ करने की ताकत हम सबके अपने हाथों में ही है — को बहुत अच्छे से दर्शाती है। (यह सिर्फ एक उदाहरण है — अपनी खुद की पसंदीदा पंक्ति चुनकर अपनी वजह लिखो!)

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पाठ से आगे (Beyond the poem)

Patto here! These are fun activities from the book that go beyond just the poem — real-life देश-प्रेम!

आपकी बात (क) — चित्र पहचानो

नीचे कुछ चित्रों (scenarios) का वर्णन दिया गया है। इनमें से कौन-से 'स्वदेश-प्रेम' की श्रेणी में आते हैं, यह पहचानो और सही (✓) का चिह्न लगाओ:

चित्र (Scenario)स्वदेश-प्रेम?
बच्ची अपने बगीचे में पौधों को पानी दे रही है✅ हाँ — पर्यावरण की देखभाल भी देश-प्रेम है
ट्रेन में परिवार खाना खाकर कचरा फर्श पर फैला रहा है❌ नहीं — सार्वजनिक जगह गंदी करना देश-प्रेम नहीं
दो पहलवान राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कुश्ती लड़ रहे हैं✅ हाँ — खेल में मेहनत करके देश का नाम रोशन करना देश-प्रेम है
बच्चे दिव्यांग व्यक्ति की मदद के लिए मिलकर पानी और चूल्हा तैयार कर रहे हैं✅ हाँ — एक-दूसरे की, समाज के हर सदस्य की मदद करना भी देश-प्रेम है
बच्ची सैनिक को फूल भेंट करके सम्मान दे रही है✅ हाँ — सैनिकों का सम्मान करना देश-प्रेम है
बच्चे मिलकर पार्क की सफ़ाई कर रहे हैं✅ हाँ — सार्वजनिक जगहों को साफ़ रखना देश-प्रेम है
किसान खेत में ट्रैक्टर से खेती कर रहा है✅ हाँ — मेहनत से अन्न उगाना देश की सेवा है
बच्ची बुज़ुर्ग महिला को सड़क पार करने में मदद कर रही है✅ हाँ — बड़ों की मदद और सम्मान करना देश-प्रेम है
बच्चे बुज़ुर्ग व्यक्ति का सहारा देकर उसकी मदद कर रहे हैं✅ हाँ — यह भी सामाजिक कर्तव्य और देश-प्रेम है
बच्चा ऐतिहासिक इमारत (कुतुब मीनार) की दीवार पर चॉक से चित्र बना रहा है❌ नहीं — राष्ट्रीय धरोहर को नुकसान पहुँचाना देश-प्रेम नहीं
विद्यार्थी झंडे के सामने अनुशासन से खड़े हैं (सभा/असेंबली)✅ हाँ — राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना देश-प्रेम है
बैंक में लोग कतार (लाइन) में लगकर अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं✅ हाँ — नियम और अनुशासन का पालन करना देश-प्रेम है
बच्ची "फूल न तोड़ें" के बोर्ड को देखकर फूल नहीं तोड़ती✅ हाँ — सार्वजनिक संपत्ति और प्रकृति की रक्षा करना देश-प्रेम है
ख़ाली दफ़्तर में पंखा और AC व्यर्थ में चलते छोड़ दिए गए हैं❌ नहीं — बिजली/संसाधनों की बर्बादी देश-प्रेम नहीं
बच्चे दीवार पर पेंट से बदतमीज़ी करते हुए आपस में झगड़ रहे हैं❌ नहीं — सार्वजनिक संपत्ति को गंदा करना और झगड़ना देश-प्रेम नहीं
आपकी बात (ख)

अब अपने ऊपर के उत्तरों के पक्ष में तर्क भी दो — यानी हर चित्र के लिए एक वाक्य में बताओ कि तुमने वह उत्तर (✓ या ✗) क्यों चुना। नमूने के लिए ऊपर तालिका के दाहिने कॉलम में वजह पहले से दी गई है — अपनी भाषा में भी लिख सकते हो!

हमारे अस्त्र-शस्त्र

⚔️ "सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।"

देश की सीमा पर सैनिक सुरक्षा प्रहरी की भाँति खड़े रहते हैं। वे बुरी भावना से अतिक्रमण करने वाले का सामना तोप, तलवार, बंदूक आदि से करते हैं। लेकिन हर स्वदेश-प्रेमी के अपने "अस्त्र-शस्त्र" (weapons/tools) होते हैं, जिनसे वह देश की सेवा करता है — क्या हैं वे?

स्वदेश-प्रेमीउसके अस्त्र-शस्त्र
विद्यार्थीकिताबें, कलम, ज्ञान और मेहनत से पढ़ाई करना
अध्यापकशिक्षा, अच्छे संस्कार और मार्गदर्शन देना
कृषक (किसान)हल, ट्रैक्टर, बीज — मेहनत से अन्न उगाना
चिकित्सक (डॉक्टर)दवाइयाँ, स्टेथोस्कोप, चिकित्सा-ज्ञान से बीमारों का इलाज करना
वैज्ञानिकअनुसंधान, नई खोजें और तकनीक (technology) से देश को आगे ले जाना
श्रमिक (मज़दूर)अपने हाथों की मेहनत और हुनर से निर्माण-कार्य करना
पत्रकारकलम, कैमरा और सच्ची खबरों से जनता तक सही जानकारी पहुँचाना

अपनी भाषा अपने गीत

CLASS ACTIVITY (group)

(क) कक्षा में सभी विद्यार्थी अपनी-अपनी भाषा में देश-प्रेम से संबंधित कविताओं और गीतों का संकलन (collection) करें। (ख) किसी एक गीत की कक्षा में संगीतात्मक (musical) प्रस्तुति भी करें। — यह एक सामूहिक क्लासरूम गतिविधि है, इसे अपनी कक्षा के दोस्तों के साथ मिलकर पूरा करो!

तिरंगा झंडा — कब प्रसन्न और कब उदास

🇮🇳 सोचने का समय

राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा झंडा) देश का सम्मान है। किसी एक दिन सोने से पहले अपने पूरे दिन के कार्यों को याद करो और सोचो — तुम्हारे किन कार्यों से तिरंगा झंडा उदास हुआ होगा और किन कार्यों से तिरंगे झंडे को प्रसन्नता हुई होगी?

प्रसन्न होता जब मैंने: होमवर्क ईमानदारी से खुद किया, बड़ों का सम्मान किया, बिजली-पानी बर्बाद नहीं किया, किसी दोस्त की मदद की। उदास होता जब मैंने: झूठ बोला, कचरा इधर-उधर फेंका, किसी से झगड़ा किया, या पढ़ाई से जी चुराया। (यह सिर्फ एक उदाहरण है — अपने आज के दिन के बारे में सोचकर खुद लिखो!)

झरोखे से — खादी गीत

तुमने देश-प्रेम से संबंधित 'स्वदेश' कविता पढ़ी। अब स्वदेशी कपड़े 'खादी' से संबंधित सोहनलाल द्विवेदी की कविता 'खादी गीत' का एक अंश पढ़ो।

खादी के धागे-धागे में
अपनेपन का अभिमान भरा,
माता का इसमें मान भरा,
अन्यायी का अपमान भरा;

खादी के रेशे-रेशे में
अपने भाई का प्यार भरा,
माँ-बहनों का सत्कार भरा,
बच्चों का मधुर दुलार भरा;

खादी की रजत चंद्रिका जब,
आकर तन पर मुसकाती है,
तब नवजीवन की नई ज्योति
अंतस्तल में जग जाती है;

— सोहनलाल द्विवेदी

✨ खादी गीत का भाव

खादी के हर धागे में अपनेपन का गर्व, माँ (भारत माता) का सम्मान और अन्याय करने वालों के लिए चुनौती भरी है। इसके हर रेशे में भाई का प्यार, माँ-बहनों का आदर और बच्चों का दुलार बसा है। जब खादी की चाँदी-सी चमक (रजत चंद्रिका) शरीर पर मुस्काती है, तो मन में नए जीवन की नई रोशनी जग जाती है — यानी खादी पहनना सिर्फ कपड़ा पहनना नहीं, बल्कि स्वदेश-प्रेम और आत्मनिर्भरता (स्वावलंबन) को अपनाना है।

साझी समझ

DISCUSS TOGETHER

तुमने 'स्वदेश' कविता और 'खादी गीत' का ऊपर दिया अंश पढ़ा। स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गई दोनों कविताओं में देश-प्रेम किस प्रकार अभिव्यक्त हुआ है? साथियों के साथ मिलकर चर्चा करो। साथ ही, 'खादी गीत' की पूरी कविता को पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़ो।

'स्वदेश' कविता में देश-प्रेम को हृदय (भावनाओं) और साहस के ज़रिए दिखाया गया है — जो हृदय में देश-प्रेम नहीं, वह पत्थर के समान है। वहीं 'खादी गीत' में देश-प्रेम को स्वदेशी वस्तु (खादी के कपड़े) पहनने और आत्मनिर्भर बनने के ज़रिए दिखाया गया है — खादी अपनेपन, परिवार के प्यार और नए जीवन की रोशनी का प्रतीक है। दोनों कविताएँ अलग-अलग तरीकों से एक ही भावना — अपने देश के लिए सच्चा प्रेम और गर्व — व्यक्त करती हैं।

खोजबीन के लिए

🔍 और आगे पढ़ो/सुनो

नीचे दी गई जानकारी का प्रयोग कर तुम देश-प्रेम और स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित रचनाएँ ढूँढ़ और पढ़/सुन सकते हो (किसी बड़े की मदद और निगरानी में इंटरनेट का प्रयोग करना):

  • सारे जहाँ से अच्छा — मुहम्मद इक़बाल की प्रसिद्ध देशभक्ति कविता
  • दीवानों की हस्ती — भगवतीचरण वर्मा की प्रसिद्ध कविता
  • झाँसी की रानी — सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रसिद्ध वीर-रस कविता
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Practice like the real exam

Cover the answer, try it yourself first, then tap to check!

MCQ style (1 mark each)

(ख) गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'

(क) सोहनलाल द्विवेदी — 'स्वदेश' के कवि गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' से अलग व्यक्ति हैं।

Short answer (2 marks)

हृदय: दिल, जी. भू: धरा, पृथ्वी.

जब कविता की अलग-अलग पंक्तियों के अंतिम शब्दों की ध्वनि एक-सी होती है, तो उसे तुक मिलाना कहते हैं। उदाहरण: "दाना-पानी" और "राजा-रानी" — दोनों शब्द 'आनी' ध्वनि पर खत्म होते हैं।

Longer answer (3-4 marks)

कवि के अनुसार, सच्चा देशप्रेमी वह है जिसके हृदय में स्वदेश के लिए सच्चा प्रेम हो, जो साहस के साथ आगे बढ़े और कभी हार न माने। उसे अपने देश की मिट्टी, संस्कृति और गौरव पर गर्व होना चाहिए, और समाज के साथ कदम मिलाकर चलना चाहिए। जो व्यक्ति देश की महानता से प्रभावित नहीं होता, वह पृथ्वी पर केवल एक निरर्थक भार है।

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You did it! 🎉

Chapter 1 done! You know a powerful poem about loving your motherland. ⭐
देशभक्ति कविता 6 synonyms Full poem + खादी गीत योजक चिह्न तुक मिलाना हमारे अस्त्र-शस्त्र

🏁 Chapter 1 · Term 1 Hindi · Prishita, Class 8