एक आशीर्वाद
A short but powerful blessing-poem by दुष्यंत कुमार — wishing a child big dreams, real courage, and the strength to stand on their own feet.
कवि परिचय (About the poet)
One of Hindi's most beloved poets, born in Bijnaur, Uttar Pradesh. In a short lifetime, he enriched Hindi literature with diverse, vibrant works. साये में धूप is his most celebrated collection of ghazals. His complete works are published as दुष्यंत कुमार रचनावली in four volumes.
कविता (The poem)
तेरे स्वप्न बड़े हों
भावना की गोद से उतरकर
जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें
चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए
रूठना-मचलना सीखें
हँसें
मुसकराएँ
गाएँ
हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ
उँगली जलाएँ
अपने पाँवों पर खड़े हों।
जा,
तेरे स्वप्न बड़े हों।
— दुष्यंत कुमार
This is a blessing given to a young person (likely a child): may your dreams be big. May you step out of pure imagination and learn to walk on real ground quickly. May you desire and strive for things that seem as unreachable as the moon and stars. May you laugh, smile, sing, be tempted by every lamp's light (curiosity), even burn your finger trying (accept the risk of failure) — and above all, may you learn to stand on your own two feet.
मेरी समझ से (Comprehension)
निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। किताब खुद कहती है — "कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।" यानी सिर्फ एक गोला भरना जरूरी नहीं, जो-जो विकल्प सही लगें उन सब पर ★ लगाओ!
★ बच्चों को — यही सबसे सही उत्तर है। "भावना की गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें" जैसी पंक्तियाँ साफ बताती हैं कि यह किसी छोटे बच्चे को दिया गया आशीर्वाद है, जो अभी चलना और बड़ा होना सीख रहा है।
विकल्प क्यों गलत हैं — युवा वर्ग को: कविता में सीधे युवाओं की बात नहीं, बल्कि बड़े होने की प्रक्रिया की बात है। नागरिकों को: कविता में नागरिकता या समाज का कोई संदर्भ नहीं। श्रमिकों को: कविता में काम या मजदूरी का कोई जिक्र नहीं है — यह सिर्फ एक भटकाने वाला (distractor) विकल्प है।
★★ आकांक्षाएँ और रुचियाँ रखना और बड़े लक्ष्य निर्धारित करना — दोनों सही हैं। कविता में 'स्वप्न' सिर्फ नींद का सपना या हवाई कल्पना नहीं, बल्कि सच में हासिल करने लायक बड़े लक्ष्य और आकांक्षाएँ हैं ("जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें" — यानी असली दुनिया में उतरना)।
क्यों नहीं — "कल्पना की उड़ान भरना" गलत है क्योंकि कविता कहती है सपनों को भावना की गोद से उतरकर धरती पर चलना सीखना चाहिए — यानी सिर्फ कल्पना में उड़ना काफी नहीं। "बहुत-सी उपलब्धियाँ पाना" भी ठीक नहीं क्योंकि कविता संख्या की नहीं, सपनों के बड़े और सच्चे होने की बात करती है।
★★ चुनौतियों को स्वीकार करना और कष्टों से नहीं घबराना — दोनों सही हैं। "उँगली जलाना" यहाँ मुहावरे जैसा प्रयोग है — दीये की रोशनी के करीब जाकर जोखिम उठाना, यानी नए काम आजमाते वक्त होने वाली छोटी-मोटी तकलीफ से न डरना।
क्यों नहीं — "प्रकाश का प्रसार करना" गलत है — यहाँ बात रोशनी फैलाने की नहीं, खुद रोशनी की तरफ आकर्षित होकर जोखिम लेने की है। "अग्नि के ताप का अनुभव करना" भी शाब्दिक अर्थ है, कविता का असली भाव (चुनौती स्वीकारना) नहीं।
★ आत्मनिर्भर होना — यही मुख्य भाव है। "अपने पाँवों पर खड़े होना" एक मुहावरा है जिसका मतलब है खुद अपने बल पर, बिना दूसरों पर निर्भर रहे, जीने में सक्षम होना।
बाकी विकल्प क्यों कम सही हैं — "अपने पैरों पर खड़े होना" सिर्फ शब्दार्थ है, मुहावरे का गहरा भाव नहीं बताता। "सफलता प्राप्त करना" और "कठिनाइयों का सामना करना" आत्मनिर्भरता के नतीजे या रास्ते हो सकते हैं, पर मुहावरे का सीधा अर्थ नहीं।
किताब पूछती है: "हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?" — यानी सिर्फ सही उत्तर जानना काफी नहीं, अपने दोस्तों के साथ बैठकर बताओ कि तुमने वही विकल्प क्यों चुना। Patto कहती है: यह कोई सही-गलत वाला टेस्ट नहीं, अपनी सोच समझाने की practice है!
पंक्ति मिलान (line matching)
| पंक्ति | अर्थ |
|---|---|
| भावना की गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें | भावनाओं में न बहकर वास्तविकता का सामना करना |
| हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ | विविध ज्ञान के प्रति आकृष्ट होना और उसे पाने की ललक होना |
| चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए रूठना-मचलना सीखें | असंभव से लगने वाले लक्ष्यों के लिए हठ और प्रयास करना |
| हँसें, मुसकराएँ, गाएँ | सपनों को आनंद और मुस्कुराहटों में बदलें; कठिन परिस्थितियों में भी मनोबल बनाए रखें |
चर्चा और कल्पना (Discuss & imagine)
पंक्तियों पर चर्चा (Lines for discussion)
पाठ से चुनकर ये तीन पंक्तियाँ दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और सोचिए कि इनका क्या अर्थ समझ में आया।
यह एक आशीर्वाद है — बड़े और साहसी सपने देखने की शुभकामना। "जा" शब्द से लगता है कि यह किसी को विदा करते समय, नई शुरुआत के लिए दिया गया आशीर्वाद है।
सपने सिर्फ कल्पना (आसमान/भावना) में उड़ते न रहें, बल्कि जल्दी असली दुनिया (पृथ्वी) में उतरकर सच्चाई का सामना करना सीखें — यानी सपनों को हकीकत में बदलने के लिए मेहनत करना सीखें।
चाँद-तारे पाना असंभव जैसा लगता है, पर कवि कहते हैं कि ऐसे कठिन, दूर के लक्ष्यों के लिए भी जिद और लगन (रूठना-मचलना) रखनी चाहिए — यानी मुश्किल सपनों को पाने की कोशिश कभी मत छोड़ना।
अनुमान और कल्पना से (Guess & imagine)
(क) कविता में सपनों के बड़े होने की बात की गई है। आपके अनुसार बड़े सपने कौन-कौन से हो
सकते हैं और क्यों?
नमूना जवाब: जैसे — डॉक्टर बनकर गाँव के गरीब लोगों का मुफ्त इलाज करना,
अंतरिक्ष यात्री बनना, अपने देश के लिए ओलंपिक मेडल जीतना। ये सपने "बड़े" इसलिए हैं क्योंकि इनमें बहुत
मेहनत, समय और हिम्मत लगती है, और ये सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि दूसरों की भलाई के लिए भी होते हैं।
(ख) "हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ/उँगली जलाएँ" पंक्ति में सपनों और लक्ष्यों को पूरा करने
के लिए ललक (चाहत) की बात की गई है। ललक के साथ और क्या-क्या होना आवश्यक है और क्यों?
(संकेत — योजना, प्रयास आदि)
नमूना जवाब: सिर्फ चाहत काफी नहीं होती। साथ में सही
योजना (कैसे और कब क्या करना है), लगातार प्रयास व मेहनत, धैर्य, और सही मार्गदर्शन भी
चाहिए — तभी सपना सच होता है, वरना सिर्फ चाहना ही रह जाता है।
(ग) कल्पना कीजिए कि आपका सपना ही आपका मित्र है। आपको उससे बातचीत करनी हो तो क्या बात
करेंगे?
नमूना जवाब: मैं अपने सपने से कहूँगी — "तुम्हें पाने के लिए मैं हर दिन थोड़ी-थोड़ी
मेहनत करूँगी, हार नहीं मानूँगी, और जब मुश्किल आएगी तो तुम्हें याद करके फिर कोशिश करूँगी।"
(घ) यदि आप किसी को आशीर्वाद देना चाहते हों तो आप किसे और क्या
आशीर्वाद देंगे और क्यों?
नमूना जवाब: मैं अपने छोटे भाई/बहन को आशीर्वाद दूँगी कि वह पढ़ाई में
मन लगाए और अपने सपनों को पूरा करने की हिम्मत रखे, क्योंकि हर बच्चे को बड़ा होकर आत्मनिर्भर बनना
चाहिए।
कविता की रचना (Poetic craft)
इस कविता में सपने को मनुष्य की तरह हँसते, मुसकराते, गाते हुए बताया गया है — यानी बिना जान वाली चीज (सपना) को इंसानी भाव-भंगिमाएँ दी गई हैं। इसे मानवीकरण (personification) कहते हैं।
ध्यान से देखें तो कविता में और भी ऐसी विशेषताएँ मिलती हैं — जैसे सपनों का "रूठना-मचलना" (जो बच्चों जैसा भाव है), "उँगली जलाना" (जोखिम के लिए प्रयोग हुआ मुहावरा), और पूरी कविता में छोटी-छोटी, बिना तुक वाली पंक्तियाँ जो इसे एक सीधी, आत्मीय बातचीत जैसा एहसास देती हैं। कक्षा में अपने दोस्तों के साथ इन पर चर्चा कीजिए और खुद कोई और विशेषता खोजने की कोशिश करें!
कविता का शीर्षक (Title of the poem)
दिलचस्प बात — कविता का शीर्षक 'एक आशीर्वाद' है, लेकिन यह शब्द पूरी कविता में
कहीं भी नहीं आया! अगर आपको इसी कविता की किसी पंक्ति या शब्द को शीर्षक बनाना हो, तो आप कौन-सी पंक्ति
या शब्द चुनेंगे और क्यों?
नमूना जवाब: मैं "तेरे स्वप्न बड़े हों" चुनूँगी, क्योंकि यही पूरी
कविता की मुख्य बात है — बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का आशीर्वाद। यह पंक्ति कविता के शुरू और
अंत दोनों में आती है, इसलिए यह सबसे उपयुक्त शीर्षक हो सकती है।
भाषा की बात (Grammar)
(क) 'स्वप्न' शब्द-जाल (word web)
किताब में एक खाली शब्द-जाल (मकड़ी के जाले जैसा डायग्राम) दिया गया है, जिसके बीच में 'स्वप्न' शब्द लिखा है और आसपास सात खाली गोले हैं। समूह में चर्चा करके इन खाली जगहों में 'स्वप्न' से जुड़े शब्द भरने होते हैं।
नमूना जवाब (आप अपने शब्द भी जोड़ सकते हैं): सपना, इच्छा, कल्पना, आकांक्षा, लक्ष्य, आशा, महत्वाकांक्षा।
(ख) ये शब्द असल में समानार्थी नहीं हैं — पहचानिए (odd one out)
| शब्द | विकल्प | जो समानार्थी नहीं है |
|---|---|---|
| पृथ्वी | धरा, वसुधा, अवनि, सुता | सुता (means daughter, unrelated) |
| चाँद | मधुकर, शशि, निशाकर, मयंक | मधुकर (means bee, not moon) |
| तारे | नक्षत्र, सोम, तारक, उडुगण | सोम (means moon, not stars) |
| रोशनी | प्रकाश, लालिमा, उजाला, आलोक | लालिमा (means redness/glow, not light) |
| स्वप्न | सपना, इच्छा, यथार्थ, कल्पना | यथार्थ (means reality — the opposite of a dream!) |
| दीया | दीन, ज्योति, दीपक, प्रदीप | दीन (means poor/humble person, unrelated to lamp) |
एक कविता बनाइए जिसमें एक ही संज्ञा (जैसे "बादल") के साथ कई क्रियाएँ जुड़ें — उदाहरण: "बादल घिरते देखा है, बादल गरजते देखा है, बादल बरसते देखा है..." अब "स्वप्न" के साथ अपनी खुद की पंक्तियाँ बनाइए।
आना-जाना
'आना' और 'जाना' दो महत्वपूर्ण क्रियाएँ हैं। कक्षा में दो समूह बनाइए —
एक समूह का नाम 'आना' और दूसरे समूह का नाम 'जाना' होगा। अपने-अपने समूह में इन दोनों क्रियाओं का
प्रयोग करते हुए सार्थक वाक्य बनाइए और उन्हें चार्ट पेपर पर चिपकाकर अपनी कक्षा में लगाइए।
नमूना वाक्य — 'आना' समूह: मेहमान घर आना चाहते हैं। स्कूल बस समय पर आना चाहिए।
नमूना वाक्य — 'जाना' समूह: हमें रोज स्कूल जाना है। वह बाजार जाना भूल गया।
पाठ से आगे (Beyond the lesson)
डायरी — हँसें-मुसकराएँ-गाएँ
अपने किसी एक दिन की समस्त गतिविधियों पर ध्यान दीजिए और अपनी डायरी में लिखिए कि आप दिनभर में कब-कब हँसे, कब-कब मुसकराए, कब-कब गाए, कब-कब रूठे, कब-कब मचले? (जैसे: "सुबह माँ की बात पर हँसी आई... दोपहर में गाना गाते हुए खाना खाया... शाम को दोस्त से छोटी बात पर रूठ गई...")
आपकी बात
कविता के माध्यम से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें पूरा करने का
आशीर्वाद दिया गया है। दिन-प्रतिदिन के जीवन में आपको अपने माता-पिता, अध्यापक एवं परिजनों से किस
तरह के आशीर्वाद मिलते हैं? अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
नमूना जवाब: "खूब पढ़ो-लिखो और
आगे बढ़ो", "सदा खुश रहो", "जीवन में सफल बनो", "हमेशा सच बोलना" — ऐसे आशीर्वाद रोज मिलते हैं।
आप भी अपने से छोटों के प्रति किसी न किसी प्रकार से शुभेच्छा प्रकट
करते हैं, उन्हें लिखिए।
नमूना जवाब: छोटे भाई-बहनों से कहती हूँ — "तुम भी खूब पढ़ना और
बड़े होकर अपने सपने पूरे करना", "हमेशा खुश रहो", "अच्छे नंबर लाओ।"
सपनों की बातें
आप क्या करना चाहते हैं और क्या पाना चाहते हैं? उन्हें एक परची पर लिखें। परची पर अपना नाम लिखना आवश्यक नहीं है। अपने अध्यापक द्वारा लाए गए डिब्बे में अपनी-अपनी परची को डाल दें। अध्यापक एक-एक करके इन परचियों पर लिखे सपनों को पढ़कर सुनाएँ। सभी विद्यार्थी अपने-अपने सुझाव दें कि उन सपनों को पूरा करने के लिए —
- किस तरह के प्रयत्न करने होंगे?
- किस तरह से योजना बनानी होगी?
- किससे और किस प्रकार का सहयोग लिया जा सकता है?
- लक्ष्य-प्राप्ति में संभावित चुनौतियाँ कौन-कौन सी हो सकती हैं?
हमारे सपने (Our family's dreams)
आपके माता-पिता या अभिभावक आपकी आवश्यकताओं और इच्छाओं को जानते-समझते हैं। अपने माता-पिता या अभिभावक से उनके द्वारा देखे गए सपनों और इच्छाओं के बारे में पूछिए कि वे क्या-क्या करना चाहते थे या चाहते हैं। नीचे दी गई तालिका में उन सपनों को लिखिए — आप इस तालिका को और बढ़ा भी सकते हैं।
| घर के सदस्य | उनके सपने (अपने घर से पूछकर भरें) |
|---|---|
| माता | — अपने घर से पूछकर भरें — |
| पिता | — अपने घर से पूछकर भरें — |
| दादा | — अपने घर से पूछकर भरें — |
| दादी | — अपने घर से पूछकर भरें — |
| नाना | — अपने घर से पूछकर भरें — |
| नानी | — अपने घर से पूछकर भरें — |
| बहन | — अपने घर से पूछकर भरें — |
| भाई | — अपने घर से पूछकर भरें — |
सबके सपने (Everyone's dreams)
प्रतिदिन की आवश्यकताओं को पूरा करने में बहुत-से लोग सहयोग देते हैं,
जैसे — सब्जी विक्रेता, स्वच्छताकर्मी, रिक्शाचालक, सुरक्षाकर्मी आदि। इनमें से किसी एक से
साक्षात्कार कीजिए और उनके सपनों के विषय में जानिए। साक्षात्कार के समय कौन-कौन से प्रश्न हो सकते
हैं? उनकी एक सूची भी बनाइए।
नमूना प्रश्न: आपका बचपन का सपना क्या था? क्या आपने उसे पूरा
किया, या अब भी कोशिश कर रहे हैं? आपके सामने कौन-सी चुनौतियाँ आईं? आप अपने बच्चों के लिए क्या सपना
देखते हैं?
सपनों की उड़ान (by Dr. Kalam)
सपने वह नहीं होते जो आप नींद में देखते हैं, सपने वह होते हैं जो आपको सोने नहीं देते। अपने सपने पूरे करने के लिए आपको जागते रहना होता है, पूरी तरह आँखें खोलकर जागते रहना होता है।
आज जितनी संभावनाएँ हैं, उतनी अब तक के समूचे इतिहास में पहले कभी नहीं थीं। इक्कीसवीं सदी ऐसे अनुभव पैदा कर रही है जिन्हें मानव के विकास की पिछली बीस शताब्दियों में असंभव समझा जाता था। ऐसे माहौल में जब प्रौद्योगिकी और नित नई खोजों के बल पर मानव सभ्यता तरक्की करती जा रही है, इंसान में छिपी संभावनाओं का भी तेजी से विस्तार होता जा रहा है। लेकिन इन अवसरों का अनुभव करने के लिए हमारे पास जो समय है वह उतना का उतना ही है और आज के युवा इसी दुविधा में हैं। युवा चाहते हैं कि उनके सामने जितने किस्म के अनुभव उपलब्ध हैं, वह सबका फायदा उठा सकें, जो कि उन्हें मिलना भी चाहिए लेकिन जैसे-जैसे दुनिया का दायरा बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे हमें खुद को कुछ खास विषयों के संकरे दायरे में सीमित कर लेना पड़ रहा है। मुझे नहीं लगता कि ऐसा करना सही है। मेरा सपना है कि संसार के हर युवा को संसार के वह सारे अनुभव मिल सकें जिसकी उन्हें चाह हो। लेकिन इसे कैसे संभव बनाया जा सकता है?
इसे संभव बनाने के दो तरीके हैं। एक तो यह कि हम कुछ ऐसा करें कि हमारे पास जो समय उपलब्ध है उसे हम बढ़ा सकें। दूसरा यह कि हमारे पास जो समय है, हम उतने ही समय में जितना काम कर सकते हैं, उसकी मात्रा बढ़ा दें। इन दोनों जीवन-लक्ष्यों को कैसे प्राप्त किया जाए, यह समझ लेने से दूसरी हर चीज तक पहुँचने के दरवाजे खुद-ब-खुद खुल जाएँगे। यही वह लंबी छलांग है जिसका मानवता को अब तक इंतजार था और जो हमें विकास क्रम के अगले चरण तक पहुँचा सकती है।
— डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
साझी समझ (Shared understanding)
किताब कहती है: "आपने 'एक आशीर्वाद' कविता पढ़ी और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल
कलाम का उपर्युक्त उद्बोधन भी पढ़ा। अब आप इन दोनों पर कक्षा में अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए।"
दोनों रचनाएँ बड़े और साहसी सपने देखने की बात करती हैं — दुष्यंत कुमार चाहते हैं कि बच्चे बड़े
लक्ष्य रखें और आत्मनिर्भर बनें, वहीं डॉ. कलाम कहते हैं कि असली सपने वे हैं जो हमें सोने नहीं देते
और उन्हें पूरा करने के लिए जागते रहकर मेहनत करनी पड़ती है। अपनी कक्षा में दोस्तों से चर्चा कीजिए —
दोनों रचनाओं में सपनों को लेकर क्या समानता है, और क्या अंतर?
खोजबीन के लिए (Research activity)
कला, विज्ञान, राजनीति, खेलकूद, मनोरंजन आदि क्षेत्रों में ख्याति प्राप्त
करने वाले व्यक्तियों ने अपने-अपने सपनों को पूरा करने की संघर्ष-यात्रा के बारे में लिखा है। उन्होंने
अपने सपनों को साकार करने के लिए किस तरह से योजना बनाई, क्या-क्या संघर्ष किए? पुस्तकालय अथवा
इंटरनेट की सहायता से ऐसे व्यक्तियों के बारे में पढ़िए।
नमूना विचार: जैसे किसी खिलाड़ी ने ओलंपिक मेडल जीतने के लिए वर्षों तक कड़ा अभ्यास किया,
या किसी वैज्ञानिक ने बार-बार असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी। अपनी पसंद के क्षेत्र से एक ऐसे
व्यक्ति को चुनिए और उनकी कहानी अपनी कक्षा में साझा कीजिए।
Practice like the real exam
MCQ style (1 mark each)
(ख) दुष्यंत कुमार
Short answer (2 marks)
यथार्थ (opposite of dream — means reality). इसके अलावा दूसरे शब्द-समूहों में भी एक-एक odd-word है जैसे "मधुकर" (चाँद का समानार्थी नहीं, मतलब भँवरा)।
Longer answer (3-4 marks)
दोनों रचनाएँ बड़े और साहसी सपने देखने की बात करती हैं। दुष्यंत कुमार चाहते हैं कि बच्चे बड़े लक्ष्य रखें, चुनौतियों से न घबराएँ और आत्मनिर्भर बनें। डॉ. कलाम भी कहते हैं कि असली सपने वे हैं जो हमें सोने नहीं देते, और उन्हें पूरा करने के लिए जागते रहकर मेहनत करनी पड़ती है। दोनों रचनाएँ सिर्फ सपने देखने की नहीं, बल्कि उन्हें साकार करने के लिए मेहनत और साहस की बात करती हैं।
You did it! 🎉
🏁 Chapter 3 · Term 1 Hindi · Prishita, Class 8