हरिद्वार
A beautiful travel letter by भारतेंदु हरिश्चंद्र, describing his visit to the sacred town of Haridwar in 1871.
लेखक परिचय (About the author)
Famous for the maxim "निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल" (progress in one's own language is the root of all progress), he wrote poetry, drama, essays, and travelogues. He published कविवचन सुधा, हरिश्चंद्र मैगजीन, हरिश्चंद्र चंद्रिका, and बालाबोधिनी (for women). His works carry tones of social reform, love for the nation, and opposition to British rule. He is considered the father of modern Hindi literature. Notable works: सत्य हरिश्चंद्र, भारत-दुर्दशा, अंधेर नगरी, सरयूपार की यात्रा.
पत्र (The letter)
This is a letter written to the editor of कविवचन सुधा magazine on 14 October 1871, describing a visit to Haridwar.
The author describes Haridwar as a पुण्यभूमि (sacred land) surrounded by green mountains, comparing tall trees to साधु (ascetics) enduring every season. He describes the Ganga's two channels (नील धारा and गंगा-नाम धारा), Har Ki Pauri ghat, and the five key tirthas — हरिद्वार, कुशावर्त, नीलधारा, विल्वपर्वत, कनखल. He describes bathing during a lunar/solar event (ग्रहण), then eating a simple meal by the riverbank on a stone plate — which he found more pleasurable than eating off a golden plate.
He closes by asking the editor to give the letter a place/value, signing off as "आपका मित्र — यात्री — भारतेंदु हरिश्चंद्र."
वृक्षों की तपस्या: बड़े-बड़े वृक्ष हर मौसम को सहते हुए तपस्या करते हैं, साधुओं की तरह।
निडर पक्षी: इन वृक्षों पर अनेक रंग के पक्षी चहचहाते हैं और शहर के दुष्ट शिकारियों से निडर होकर कल्लोल करते हैं।
पत्थर पर भोजन का सुख: "उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था" — संतुष्टि में ही असली सुख है।
मेरी समझ से (Comprehension)
• लेखक के अनुसार सज्जन लोग बिना पूछे स्वादिष्ट रसीले फल देते हैं।
• ★ लेखक फलदार वृक्षों की उदारता को मानवीय रूप में व्यक्त कर रहे हैं।
• लेखक का मानना था कि हरिद्वार के सभी दुकानदार बहुत सज्जन थे।
• लेखक को पत्थर मारकर पके हुए फल तोड़कर खाना पसंद था।
सही उत्तर: पेड़ पत्थर मारने पर भी फल देते हैं — ठीक वैसे ही जैसे सज्जन लोग गलत व्यवहार का भी अच्छे से जवाब देते हैं। यह वृक्षों की उदारता को इंसानों जैसा बताया गया है।
• शारीरिक थकान और मानसिक बेचैनी
• आर्थिक संतोष और मानसिक विकास
• ★ मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव
• सामाजिक सद्भाव और पारिवारिक प्रेम
सही उत्तर: मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव — हरिद्वार के पवित्र वातावरण का सीधा असर।
• ★ संतुष्टि में सुख होता है।
• सुखी लोग पत्थर पर भोजन करते हैं।
• लेखक के पास सोने की थाली नहीं थी।
• पत्थर पर रखा भोजन अधिक स्वादिष्ट होता है।
सही उत्तर: संतुष्टि (contentment) में ही असली सुख होता है — यह भोग-विलास की नहीं, मन की संतुष्टि की बात है।
• अंधविश्वास और लालच
• मानवता और देशप्रेम
• ★ सादगी और आत्मनिर्भरता
• ★ स्वच्छता और प्रकृति प्रेम
सही उत्तर: सादगी और आत्मनिर्भरता, साथ ही स्वच्छता और प्रकृति-प्रेम भी — साधारण जीवन में भी संतोष और आनंद हो सकता है।
• राजनीतिक
• ★ आध्यात्मिक
• सामाजिक
• ★ प्राकृतिक
सही उत्तर: आध्यात्मिक — बार-बार शुद्ध होने, वैराग्य, भक्ति और पुण्यभूमि के संदर्भ आते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन भी बहुत है, इसलिए दोनों उत्तर उपयुक्त हैं।
• कठिन शब्दों का प्रयोग और बोझिलता
• मुहावरों का अधिक प्रयोग
• ★ सरलता और चित्रात्मकता
• जटिलता और संक्षिप्तता
सही उत्तर: सरलता और चित्रात्मकता — भाषा वर्णनात्मक और सजीव है, फिर भी सरल।
हो सकता है कि तुम्हारे दोस्तों ने ऊपर अलग-अलग सही उत्तर चुने हों — कुछ प्रश्नों में एक से ज़्यादा सही जवाब भी हो सकते हैं। अपने परिवार या दोस्तों के साथ चर्चा करो कि तुमने वही उत्तर क्यों चुना।
🌟 मिलकर करें चयन (spot the right conclusion)
पाठ से ये पंक्तियाँ चुनी गई हैं। हर पंक्ति के आगे दो निष्कर्ष दिए हैं — एक सही, एक भ्रामक (misleading)। सही वाले पर तारा (★) लगाओ, फिर तापकर जाँच लो!
• ★ लताओं का फैलना सज्जनों की शुभ इच्छाओं की तरह सौम्यता और सुंदरता को दर्शाता है।
• सज्जनों की शुभ इच्छाएँ लताओं के समान फैल जाती हैं। (भ्रामक — तुलना उलटी दिशा में कर दी गई है)
• वृक्षों की स्थिति साधुओं जैसी है जो हर मौसम को सहने के लिए विवश हैं। (भ्रामक — "विवश/मजबूर" गलत भाव है)
• ★ वृक्षों की स्थिति साधुओं जैसी है जो हर मौसम को सहते हुए तपस्या करते हैं।
• ★ यहाँ के पक्षी प्रकृति में सुरक्षित अनुभव करते हैं, इसलिए वे निडर होकर कल्लोल करते हैं।
• यहाँ के पक्षी नगर से डरकर इस जगह आ गए हैं इसलिए वे कल्लोल करते हैं। (भ्रामक — पक्षी डरे हुए नहीं, निडर हैं)
• ★ गंगाजल की ठंडक और मिठास का अनुभव बहुत मनोहारी है।
• गंगाजल की शीतलता और मिठास से शक्कर और बरफ बनाई जा सकती है। (भ्रामक — यह लेखक की उपमा है, वास्तविक बात नहीं)
• लेखक ने भोजन इसलिए बनाया क्योंकि गंगा का पानी बहुत गरम था और वह पकाने में सहायक था। (भ्रामक — गंगाजल तो अत्यंत शीतल बताया गया है)
• ★ लेखक ने गंगा के समीप बैठकर भोजन किया, जिससे उनकी प्रकृति से निकटता झलकती है।
• ★ लेखक चाहता है कि पत्र को महत्व देकर कहीं स्थान दिया जाए, यानी इसे पढ़ा और सँजोया जाए।
• लेखक चाहता है कि पत्र को महत्व देकर प्रकाशित किया जाए। (भ्रामक — यहाँ "स्थान देना" पढ़े/सँजोए जाने की बात है, सिर्फ छपाई की नहीं)
💬 पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से ये पंक्तियाँ चुनी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़ो और सोचो — इनका क्या अर्थ समझ में आया?
लेखक कह रहे हैं कि हरिद्वार इतनी पवित्र भूमि है कि यहाँ की मामूली-सी घास तक सुगंधित है — जैसे पवित्रता वहाँ की हर छोटी चीज़ में भी बस गई हो।
लेखक वृक्षों की उदारता की तारीफ कर रहे हैं — पेड़ ज़िंदा रहते हुए तो फल-फूल-छाया देते ही हैं, मरने (जलने) के बाद कोयले और राख के रूप में भी लोगों के काम आते हैं। कोई भी उनके पास से खाली हाथ नहीं जाता।
🧠 सोच-विचार के लिए
पाठ को फिर से ध्यान से पढ़ो, पता लगाओ और अपने विचार लिखो।
यह दिखाता है कि हरिद्वार का असर लेखक के मन पर इतना गहरा था कि लौटने के बाद भी उनका मन वहीं अटका हुआ है। संकेत: किसी स्थान से लौटने के बाद भी उसी के विषय में सोचते रहना — जैसे तुम्हें भी किसी पसंदीदा जगह से लौटने के बाद बार-बार उसकी याद आती होगी!
यह अपने विचारों का प्रश्न है — उदाहरण सहित सोचो: क्या आज भी ऐसे संतोषी लोग मिलते हैं जो थोड़े में ही खुश रहते हैं? या आज ज़्यादातर लोग हमेशा और ज़्यादा पाने की चाह में रहते हैं? दोनों तरह के उदाहरण अपने आसपास से सोचकर लिखो।
संकेत: सिर्फ आराम और सुविधा ही नहीं, कोई और कारण भी हो सकता है। पाठ में आगे लिखा है — "चारों ओर से शीतल पवन आती थी।" यानी वह जगह ऊँचाई पर, ठंडी हवा वाली और शांत थी — इसलिए ठहरने के लिए बहुत अच्छी जगह थी।
वृक्ष अपने जीवनकाल में ही नहीं, मरने के बाद भी उपयोगी होते हैं — फल-फूल-छाया से लेकर लकड़ी और जड़ तक, और जल जाने पर कोयला-राख तक कुछ-न-कुछ काम आता है। यानी वृक्ष का कोई भी हिस्सा व्यर्थ नहीं जाता — इसलिए उन्हें बचाना और लगाना बहुत ज़रूरी है।
🌈 अनुमान और कल्पना से
अपनी कल्पना से इन सवालों के जवाब सोचो और लिखो — कोई गलत जवाब नहीं होता!
अपने विचार लिखो — जैसे हर की पैड़ी पर गंगा स्नान करना, पहाड़ों को देखना, पक्षियों की आवाज़ सुनना, नदी किनारे बैठकर भोजन करना, गंगा आरती देखना वगैरह।
अपनी कल्पना से लिखो — जैसे: पानी की ठंडक से एक झुरझुरी-सी महसूस हुई, ताज़गी और खुशी का अनुभव हुआ, मन एकदम शांत हो गया।
अपनी कल्पना का इस्तेमाल करो — मज़ेदार सोचो! जैसे पेड़ बात करने लगें, शिकायत करें, या इनाम-सज़ा दें अपनी मर्ज़ी से।
'श्री' और 'जी' सम्मान दिखाने के लिए लगाए गए शब्द हैं। गंगा नदी को भारत में बहुत पवित्र और पूजनीय माना जाता है, इसलिए लेखक ने उसे आदरसूचक शब्दों से संबोधित किया — जैसे हम किसी बड़े या आदरणीय व्यक्ति के नाम के साथ 'जी' लगाते हैं।
कुछ सुझाव: दृष्टिबाधित साथी के लिए — रास्ते में हर जगह का शब्दों में वर्णन करना, हाथ पकड़कर सुरक्षित तरीके से चलाना, नदी की आवाज़, हवा और सुगंध का अनुभव कराना। श्रवणबाधित साथी के लिए — इशारों (sign language) या लिखकर बात करना, हर जगह पहले से चित्र या नक्शा दिखाना, आँखों से संपर्क बनाए रखना।
🗨️ लिखें संवाद
नीचे दी गई पंक्तियों के आधार पर एक काल्पनिक संवाद लिखो।
लेखक और कल्लू जी के बीच हरिद्वार यात्रा पर एक काल्पनिक संवाद लिखिए — जैसे वे दोनों गंगा स्नान के बाद पेड़ के नीचे बैठकर बातें कर रहे हों। सोचो, वे एक-दूसरे से क्या-क्या कहते होंगे — शायद हरिद्वार की सुंदरता के बारे में, या रात को हुए ग्रहण के बारे में!
लेखक और प्रकृति के बीच एक कल्पनात्मक संवाद तैयार कीजिए — जैसे पर्वत बोल रहे हों! सोचो पर्वत लेखक से क्या कहेंगे, और लेखक क्या जवाब देंगे।
🔗 शब्द-मिलान (मिलकर करें मिलान)
ये शब्द पाठ से चुने गए हैं — इनका अर्थ नीचे मिलाओ।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| हरिद्वार | भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थान, जहाँ से गंगा पहाड़ों को छोड़कर मैदान में आती है। |
| गंगा | भारतवर्ष की प्रधान नदी, हिमालय से निकलकर लगभग 1560 मील पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है — भागीरथी, त्रिपथगा, अलकनंदा, मंदाकिनी, सुरनदी भी नाम हैं। |
| भगीरथ | अयोध्या के सूर्यवंशी राजा, जिन्होंने घोर तपस्या करके गंगा को पृथ्वी पर लाया — गंगा का नाम 'भागीरथी' इसी से पड़ा। |
| चण्डिका | मान्यताओं के अनुसार दुर्गा का एक रूप। |
| भागवत | अठारह पुराणों में सर्वप्रसिद्ध पुराण, जिसमें अधिकांश श्रीकृष्ण संबंधी कथाएँ हैं। |
| दालचीनी | एक पेड़, दक्षिण भारत में बहुतायत — सुगंधित छाल दवा और मसाले के काम आती है। |
गंगा हिमालय से निकलकर लगभग 1560 मील (करीब 2510 किमी) पूर्व की ओर बहती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है। यह नंबर परीक्षा में पूछा जा सकता है, इसे याद रखो!
भाषा की बात: आदरार्थ बहुवचन
Even for a single, respected person or thing, we sometimes use the PLURAL verb form (है → हैं) to show respect. E.g., "गंगा जी... हैं" instead of "है," even though गंगा is singular — this shows reverence.
रिक्त स्थान भरिए (सभी 10 वाक्य)
हैं ... हैं (आदरार्थ — "जी" शब्द से आदर स्पष्ट)
होते हैं (माता-पिता आदरणीय — बहुवचन क्रिया)
है ("बहन" — सामान्य वाक्य में आदरार्थ ज़रूरी नहीं, इसलिए एकवचन क्रिया)
आ रहा है / खड़ा है (फेरीवाला — सामान्य, आदरार्थ नहीं, इसलिए एकवचन क्रिया)
हैं (जी होने से आदरार्थ)
आए हैं ... आपका / आप (आदरार्थ "आप" संबोधन से बहुवचन क्रिया)
हैं ("साहब" से आदर)
हैं ... उनसे / आपके माता-पिता (माता-पिता के लिए हमेशा बहुवचन आदरार्थ क्रिया)
हैं ... इनसे / इनके (अध्यापक — आदरणीय व्यक्ति, इसलिए बहुवचन क्रिया)
रहा है / कूद रहा है (बंदर — जानवर, आदरार्थ नहीं, इसलिए एकवचन क्रिया)
ऊपर के हर वाक्य के लिए अपने दोस्तों या परिवार के साथ चर्चा करो — तुमने वही शब्द (है/हैं) क्यों चुना? संकेत: यह देखो कि जिस व्यक्ति/चीज़ की बात हो रही है वह आदरणीय है या नहीं, और क्या उसके नाम के साथ "जी/साहब/आप" जैसे आदरसूचक शब्द लगे हैं।
काल और भाव पहचान
काल के तीन भेद होते हैं — भूतकाल (past — हुआ/था), वर्तमान काल (present — होता है/है), और भविष्य काल (future — होगा/करेंगे)। नमूने का वाक्य: "यहाँ हरि की पैड़ी नामक एक पक्का घाट है और यहीं स्नान भी होता है" — यह वर्तमान काल को दर्शाता है, क्योंकि इसमें "है/होता है" जैसी क्रियाएँ आई हैं।
काल की पहचान (Tense identification) — भाग (क)
भविष्य काल ("दीजिएगा" — आगे होने वाली क्रिया)
वर्तमान काल ("है" — अभी की स्थिति)
वर्तमान काल ("हैं...देते हैं" — सामान्य वर्तमान सत्य)
भूतकाल ("होता था" — बीत चुकी क्रिया)
भूतकाल ("टिका था" — बीत चुकी क्रिया)
अब ऊपर के हर वाक्य को किसी दूसरे काल में बदलकर नया वाक्य बनाओ। उदाहरण के लिए:
- वाक्य 2 को भूतकाल में — "यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी थी।"
- वाक्य 3 को भूतकाल में — "वृक्ष ऐसे थे कि पत्थर मारने से फल देते थे।"
- वाक्य 4 को वर्तमान काल में — "चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता है।"
- वाक्य 5 को वर्तमान काल में — "मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका हूँ।"
- वाक्य 1 को वर्तमान काल में — "निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान देते हैं।"
भावों की पहचान (Identifying emotion)
प्रेम · संतोष · भक्ति · श्रद्धा · वैराग्य · आश्चर्य · करुणा · हास्य · शांति · परोपकार · दया · दुख
नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। सोचिए कि इनमें कौन-सा भाव प्रकट हो रहा है? ऊपर के शब्द-बैंक में से पहचानिए और चुनिए।
संतोष
वैराग्य और भक्ति
संतोष
शांति
परोपकार
पत्र की रचना (How the letter is built)
In this line — "और संपादक महाशय, मैं चित्त से तो अब तक वहीं निवास करता हूँ..." — the author is addressing the संपादक महोदय (editor) directly. You probably know that a letter is always addressed to the person it is written for, and at the end, the writer signs their own name so the reader knows who wrote it.
🔗 पत्र की विशेषताओं का मिलान
| पत्र की विशेषता | पत्र से उदाहरण |
|---|---|
| व्यक्तिपरकता — पत्र लेखन में लेखक के विचार, अनुभव और भावनाएँ प्रमुख होते हैं। | "ग्रहण में बड़े आनंदपूर्वक स्नान किया..." |
| संवादात्मकता — पत्र संवाद का रूप है; पाठक से सीधा संवाद होता है। | "श्रीमान कविवचन सुधा संपादक महामहिम मित्रवरेषु!" |
| स्वाभाविक शैली — भाषा कृत्रिम नहीं होती; भावनाओं के अनुरूप होती है। | "आपका मित्र — यात्री" |
| व्यक्तिगत अनुभवों का वर्णन — जहाँ लेखक अपने वास्तविक अनुभव को साझा करता है। | "मुझे हरिद्वार का समाचार लिखने में बड़ा आनंद होता है..." |
| अभिवादन या संबोधन — पत्र का आरंभ, जिसमें संबोधित व्यक्ति को आदरपूर्वक संबोधित किया जाता है। | "यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है..." (हरिद्वार की प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिकता, साधु-संन्यासियों के जीवन, नदी, पर्वत, जल, गंगा स्नान आदि का विस्तृत वर्णन) |
| हस्ताक्षर — लेखक अपने नाम या संबंध से पत्र को समाप्त करता है। | "और संपादक महाशय, मैं चित्त से तो अब तक वहीं निवास करता हूँ... निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा।" |
| उपसंहार और निवेदन — लेखक पत्र समाप्त करता है और अपनी इच्छा या निवेदन प्रकट करता है। | "एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके..." |
| मुख्य विषय-वस्तु — पत्र का असली विषय, यानी यात्रा-वर्णन। | "और संपादक महाशय, मैं चित्त से तो अब तक वहीं निवास करता हूँ..." |
पाठ में बताया गया है कि एक विशेषता को एक से अधिक वाक्यों से भी जोड़ा जा सकता है — यानी ऊपर की जोड़ी सिर्फ एक उदाहरण है, तुम खुद पाठ में और उदाहरण खोज सकते हो!
✉️ पत्र लेखन (Write your own letter)
भारतेंदु हरिश्चंद्र ने अपनी हरिद्वार यात्रा का वर्णन एक पत्र के रूप में संपादक को भेजा था। अब तुम भी अपनी किसी यात्रा के विषय में अपने किसी परिचित (दोस्त, दादा-दादी, या रिश्तेदार) को पत्र लिखकर बताओ — अभिवादन, अपने अनुभव का वर्णन, और अंत में हस्ताक्षर ज़रूर शामिल करना!
पाठ से आगे (Beyond the text — activities)
🔤 शब्द से जुड़े शब्द
'हरिद्वार' शब्द से जुड़े शब्द अपने मन से या पाठ से चुनकर लिखो — जैसे: गंगा, हर की पैड़ी, तीर्थ, कुशावर्त, नीलधारा, कनखल, पर्वत, स्नान, ग्रहण, भागवत, संपादक, यात्री, पंडे वगैरह। इन शब्दों को हरिद्वार शब्द के चारों ओर एक वेब (web) बनाकर लिख सकते हो!
🎨 लेखन के अनोखे तरीके
(क) पाठ में तुलनात्मक (comparative) वाक्य कई जगह मिलते हैं। सज्जनों-लताओं की तुलना के अलावा, यहाँ चार और तुलनात्मक वाक्य दिए हैं — तापकर देखो लेखक ने इन्हें कैसे खास बनाया।
"बड़े-बड़े वृक्ष भी ऐसे खड़े हैं मानो एक पैर से खड़े तपस्या करते हैं और साधुओं की भाँति घाम, ओस और वर्षा अपने ऊपर सहते हैं।" — वृक्षों को तपस्या करते साधुओं जैसा बताया गया है।
"जल यहाँ का अत्यंत शीतल है और मिष्ट भी वैसा ही है मानो चीनी के पने को बरफ में जमाया है।" — गंगाजल की ठंडक और मिठास की तुलना बर्फ में जमाई चीनी से की गई है।
"वर्षा के कारण सब ओर हरियाली ही दृष्टि पड़ती थी मानो हरे गलीचा की जात्रियों के विश्राम के हेतु बिछायत बिछी थी।" — चारों तरफ की हरियाली की तुलना यात्रियों के आराम के लिए बिछाए गए हरे गलीचे से की गई है।
"एक ओर त्रिभुवन पावनी श्री गंगा जी की पवित्र धारा बहती है जो राजा भगीरथ के उज्ज्वल कीर्ति की लता-सी दिखाई देती है।" — गंगा की धारा को राजा भगीरथ की चमकती कीर्ति (यश) की बेल जैसा बताया गया है।
(ख) यह रचना आज की हिंदी जैसी नहीं लिखी गई है — यह लगभग 150 साल पुरानी भाषा है। नीचे 7 पुरानी पंक्तियाँ दी गई हैं, तापकर देखो इन्हें आज की हिंदी में कैसे लिखा जा सकता है।
आज की हिंदी: "इन पेड़ों पर कई रंगों के पक्षी चहचहाते हैं और शहर के शिकारियों से बिना डरे खेलते-कूदते हैं।"
आज की हिंदी: "बारिश की वजह से चारों तरफ हरियाली ही दिखाई देती थी, मानो यात्रियों के आराम के लिए हरा गलीचा बिछा दिया गया हो।"
आज की हिंदी: "यह इतना पवित्र तीर्थ है कि जो लोग इच्छा और गुस्से से भरे रहते हैं, वे वहाँ ठहर ही नहीं पाते।"
आज की हिंदी: "वहाँ जाते ही मेरा मन इतना खुश और शांत हो गया कि उसे शब्दों में बताना मुश्किल है।"
आज की हिंदी: "यहाँ रात में ग्रहण लगा और हमने बड़े खुशी से स्नान किया, और दिन में भागवत पुराण का पाठ भी किया।"
आज की हिंदी: "उस समय पत्थर पर बैठकर किया हुआ भोजन, सोने की थाली में किए भोजन से भी कहीं ज़्यादा सुखद था।"
आज की हिंदी: "मुझे विश्वास है कि आप इस पत्र को (अपनी पत्रिका में) जगह ज़रूर देंगे।"
(ग) इस पाठ में लेखक ने कहीं-कहीं पुरानी वर्तनी (spelling) का प्रयोग किया है — जैसे 'शिखर' के लिए 'शिषर', 'यात्रियों' के लिए 'जात्रियों'। नीचे पाठ में मिले ऐसे कुछ शब्द दिए गए हैं।
| पाठ में पुरानी वर्तनी | आज की वर्तनी |
|---|---|
| शिषर | शिखर |
| जात्रियों | यात्रियों |
| बधिकों | बधिकों/व्याधों (शिकारियों) |
| मनोर्थ | मनोरथ |
| वल्ली | बेल/लता |
💬 आपकी बात (पाठ से आगे)
अपने अनुभव के बारे में सोचकर लिखो — जैसे पिकनिक, कैंपिंग, या बगीचे में खाना। खुली हवा, पक्षियों की आवाज़ और प्रकृति का साथ खाने को और भी खास बना देता है, ठीक वैसे ही जैसे लेखक को गंगा किनारे पत्थर पर बैठकर खाया भोजन सोने की थाली से भी ज़्यादा सुखद लगा था।
अपने विचार लिखो — कोई मामूली-सी चीज़ जैसे बारिश में भीगना, दोस्त के साथ हँसना, या घर की बनी कोई साधारण चीज़ खाना — जिसने बहुत खुशी दी हो।
अपने विचार लिखो — जैसे मंदिर, बगीचा, दादी-नानी का घर, पहाड़ या कोई शांत जगह — और सोचो उस स्थान की कौन-सी बातें अच्छी लगीं।
अपने विचार लिखो — जैसे घर के आँगन का कोई पेड़, दादी का लगाया पौधा, या कोई पसंदीदा फूल — और सोचो उससे कौन-सी यादें जुड़ी हैं।
🌿 प्रकृति का सौंदर्य और संरक्षण
पत्र में पढ़ा कि हरिद्वार का प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत है। इस सौंदर्य को बनाए रखने में हर इंसान की भूमिका होती है। अपने समूह में इस विषय पर चर्चा करो, फिर मिलकर "तीर्थ ही नहीं, पृथ्वी भी पावन हो!" विषय पर एक जन-जागरूकता पोस्टर बनाओ।
🧘 स्वास्थ्य और योग
5 मिनट के लिए आँखें बंद करके शांति से बैठो, अपनी साँसों पर ध्यान केंद्रित करो और आस-पास की आवाज़ें सुनो। इसके बाद, इस अनुभव के बारे में एक छोटा अनुच्छेद लिखो — कैसा महसूस हुआ, मन शांत हुआ या नहीं, कोई नई आवाज़ सुनाई दी या नहीं।
एक 'सूचना' (notice) में दिनांक, शीर्षक ("सूचना"), विषय, मुख्य जानकारी (क्या, कब, कहाँ, कैसे), और लिखने वाले का नाम/पद होना चाहिए। नमूना:
सूचना
दिनांक: 21 जून 2026
सभी विद्यार्थियों को सूचित किया जाता है कि इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर विद्यालय के प्रांगण में प्रातः 7:00 बजे सामूहिक योगाभ्यास का आयोजन किया जाएगा। सभी विद्यार्थी योगा मैट के साथ समय पर उपस्थित हों।
— खेल सचिव
🌳 सज्जन वृक्ष
"सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं" — पेड़-पौधे हमारे जीवन के लिए बहुत ज़रूरी हैं, लेकिन हमारी वजह से ही ये कम होते जा रहे हैं। (क) एक पौधा लगाओ और उसकी देखभाल करो ताकि वह कुछ वर्षों में बड़ा पेड़ बन सके — उसे एक नाम दो और उसका मित्र बनो। (ख) उसके बारे में अपनी डायरी में नियमित रूप से लिखो — कब पानी दिया, कितना बढ़ा, नई पत्तियाँ आईं या नहीं।
🔍 अपने शब्द
'शीतल वायु... स्पर्श ही से पावन करता हुआ संचार करता है' — 'शीतल' शब्द को केंद्र में रखकर उसके चारों ओर ये चार बातें लिखो:
- अर्थ (meaning): ठंडा, ठंडक भरा
- विपरीतार्थक शब्द (antonym): उष्ण / गरम
- समानार्थी शब्द (synonym): ठंडा, शीत, सर्द
- वाक्य प्रयोग (use in sentence): "गंगा का जल बहुत शीतल था।"
अब अपने समूह के हर सदस्य पत्र से एक-एक और शब्द चुनकर उसके लिए भी ऐसा ही शब्द-चित्र बनाए — जैसे 'पुण्य', 'निर्मल' या 'तपस्या'।
💰 यात्रा के व्यय की गणना
मान लो तुम्हें अपनी पसंद की किसी जगह की यात्रा के लिए ₹1000 दिए गए हैं। (क) यात्रा, खाना आदि सब मिलाकर एक व्यय-विवरण (expense sheet) बनाओ। यहाँ एक नमूना है:
| मद (item) | राशि (₹) |
|---|---|
| आना-जाना (बस/ट्रेन किराया) | 400 |
| खाना-नाश्ता | 300 |
| प्रवेश शुल्क / दर्शन | 100 |
| स्मृति-चिह्न (souvenir) | 150 |
| बचत / आपातकाल के लिए | 50 |
| कुल | ₹1000 |
(ख) इस यात्रा में एक छोटी वस्तु (स्मृति-चिह्न) खरीदनी है — क्या खरीदोगे और क्यों? संकेत: सोचो, क्या वह ज़रूरी है? बजट कैसे संभालोगे? जैसे — ₹150 में एक छोटी याद-गार वस्तु जो हल्की हो, टूटे ना, और यात्रा की याद दिलाए।
🧳 यात्रा सबके लिए
एक अच्छे गाइड की तरह सोचो — व्हीलचेयर वाले सदस्य के लिए ढलान (ramp) वाला रास्ता चुनना, बुज़ुर्गों के लिए बीच-बीच में आराम का समय रखना, छोटे बच्चों का ध्यान रखना, दृष्टिबाधित सदस्य को हाथ पकड़कर या वर्णन करके चलाना, और सबके खाने-पीने की ज़रूरतों का पहले से पता करना।
इशारों से बात करके देखो कि बिना बोले समझाना कितना मुश्किल हो सकता है। श्रवणबाधित यात्री के लिए ज़रूरी बातें: लिखकर या इशारों में जानकारी देना, महत्वपूर्ण सूचनाएँ चित्रों/लिखित रूप में देना, और हमेशा उनकी आँखों में देखकर बात करना ताकि वे होंठ पढ़ सकें।
दीवारों/मूर्तियों पर कुछ न लिखना या खरोंचना, कचरा इधर-उधर न फेंकना, तय रास्तों/सीमाओं का पालन करना, फ्लैश फोटोग्राफी से बचना (जहाँ मना हो), और गाइड या सूचना-पट्टिकाओं के नियमों का पालन करना।
🧩 आज की पहेली
पाठ में से शब्द खोजो और नीचे दिए संकेतों के आगे लिखो — तापकर उत्तर जाँच लो!
| संकेत | उत्तर |
|---|---|
| 1. एक मसाले का नाम | दालचीनी |
| 2. कपास से जुड़ा एक शब्द | जनेऊ (कपास के महीन सूत/धागे से बनता है — पाठ में "जनेऊ यहाँ का अच्छा महीन और उज्ज्वल बनता है") |
| 3. जहाँ स्नान होता है | हर की पैड़ी (घाट) |
| 4. वृक्ष के किसी अंग का नाम | छाल / जड़ / पत्ते |
| 5. एक नगर या तीर्थ का नाम | हरिद्वार / कनखल / कुशावर्त |
| 6. व्यापार से जुड़ा स्थान | ज्वालापुर |
| 7. एक नदी का नाम | गंगा |
| 8. एक पर्वत का नाम | विल्वपर्वत |
| 9. एक धार्मिक ग्रंथ का नाम | भागवत |
🪟 झरोखे से — हरिद्वार के मार्ग में
हरिद्वार के मार्ग में अनेक प्रकार के वृक्ष और पक्षी देखने में आए। एक पीले रंग का पक्षी छोटा बहुत मनोहर देखा गया। बया एक छोटी चिड़िया है उसके घोंसले बहुत मिले। ये घोंसले सूखे बबूल काँटे के वृक्ष में हैं और एक-एक डाल में लड़ी की भाँति बीस-बीस, तीस-तीस लटकते हैं। इन पक्षियों की शिल्पविद्या तो प्रसिद्ध ही है, लिखने का कुछ काम नहीं है। इसी से इनका सब चातुर्य प्रगट है कि सब वृक्ष छोड़ के काँटे के वृक्ष में घर बनाया है। इसके आगे ज्वालापुर और कनखल और हरिद्वार हैं, जिसका वृत्तांत अगले नंबरों में लिखूँगा।
इस अंश में लेखक ने बया पक्षी (weaver bird) के घोंसलों की तारीफ की है — वे काँटेदार बबूल के पेड़ में घोंसले बनाते हैं ताकि शिकारी जानवर उन तक न पहुँच सकें। इससे पता चलता है कि बया पक्षी कितने चतुर और होशियार होते हैं! सोचो — क्या तुमने कभी किसी पक्षी का ऐसा चतुराई भरा घोंसला देखा है?
🔎 खोजबीन के लिए
भारतेंदु हरिश्चंद्र का एक प्रसिद्ध नाटक है — अंधेर नगरी (यह एक व्यंग्य-नाटक है, जिसमें एक ऐसे राज्य की कहानी है जहाँ हर चीज़ की कीमत बराबर है — "टके सेर भाजी, टके सेर खाजा" — और जहाँ न्याय-अन्याय की कोई परख नहीं है)। इसे पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़ो, और अपने सहपाठियों के साथ इस पर चर्चा करो — इस नाटक से समाज को क्या सीख मिलती है?
Practice like the real exam
MCQ style (1 mark each)
(ख) भारतेंदु हरिश्चंद्र
Short answer (2 marks)
उन्होंने हिंदी में कविता, नाटक, निबंध और यात्रा-वृत्तांत जैसी विविध विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया और अपनी भाषा के महत्व पर बल दिया, इसलिए उन्हें आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक कहा जाता है।
Longer answer (3-4 marks)
लेखक ने हरिद्वार को हरे-भरे पर्वतों से घिरी पुण्यभूमि बताया है, जहाँ वृक्ष साधुओं की तरह हर मौसम सहते हुए तपस्या करते प्रतीत होते हैं। उन्होंने गंगा स्नान, ग्रहण के समय के स्नान, और भागवत पाठ का वर्णन किया है। सबसे खास बात यह है कि नदी किनारे पत्थर पर बैठकर किया गया साधारण भोजन उन्हें सोने की थाली के भोजन से भी अधिक सुखद लगा — जो संतोष और सादगी के महत्व को दर्शाता है।
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🏁 Chapter 4 · Term 1 Hindi · Prishita, Class 8